दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना 2026: ₹2.5 लाख अनुदान, ऐसे करें आवेदन Divyang Marriage Incentive Scheme
दिव्यांग विवाह अनुदान योजना 2026: जानिए कैसे मिलेंगे ₹2,50,000 और क्या हैं इसके नियम।
दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना 2026: शादी करने पर सरकार देगी ₹2.5 लाख तक की आर्थिक मदद, जानें कैसे और कहां करना है आवेदन Divyang Marriage Incentive Scheme
हमारे समाज में दिव्यांग भाई-बहनों को सशक्त बनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार लगातार कई अहम कदम उठा रही है। इसी दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने ‘दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना’ (Divyang Marriage Incentive Scheme) के तहत एक बड़ा फैसला लिया है। अब दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह को बढ़ावा देने और उन्हें सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर ₹2,50,000 (ढाई लाख रुपये) तक कर दिया गया है।
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महाराष्ट्र सरकार द्वारा दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत अब दिव्यांग जोड़ों को ₹2.5 लाख तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। जानिए योजना की पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, और ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया।
अक्सर दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह को लेकर समाज में कई तरह के पूर्वाग्रह देखने को मिलते हैं। इस सोच को बदलने और नवविवाहित जोड़ों को एक आत्मनिर्भर शुरुआत देने के लिए यह योजना एक बेहतरीन मील का पत्थर साबित हो रही है।
यदि आप या आपके आसपास कोई इस योजना का लाभ उठाना चाहता है, तो यह ब्लॉग लेख आपके लिए बेहद मददगार साबित होगा। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि यह योजना क्या है, किसे कितना लाभ मिलेगा, जरूरी पात्रता क्या है और इसके लिए आवेदन कैसे करना है।
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1. क्या है दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना?
दिव्यांग कल्याण विभाग (महाराष्ट्र सरकार) द्वारा चलाई जा रही इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को वैवाहिक, पारिवारिक और मानसिक स्थिरता प्रदान करना है। समाज में अक्सर दिव्यांगों के विवाह को एक कठिन जिम्मेदारी मान लिया जाता है, जिससे कई बार उनके विवाह में देरी होती है या सही जीवनसाथी नहीं मिल पाता। इस समस्या को दूर करने और दिव्यांग जोड़ों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए सरकार सीधे उनके बैंक खाते में यह सहायता राशि भेजती है।
2. योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता (अनुदान)
सरकार ने इस योजना के नियमों में संशोधन करके सहायता राशि को पहले के मुकाबले काफी बढ़ा दिया है। अब इसे दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:
| विवाह का प्रकार | मिलने वाली प्रोत्साहन राशि (अनुदान) |
| दिव्यांग और दिव्यांग (दोनों पार्टनर दिव्यांग हों) | ₹2,50,000 (ढाई लाख रुपये) |
| दिव्यांग और अव्यांग (एक पार्टनर दिव्यांग और एक सामान्य हो) | ₹1,50,000 (डेढ़ लाख रुपये) |
पैसों के भुगतान का जरूरी नियम (Fix Deposit Condition):
सरकार यह पूरी राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे पति-पत्नी के संयुक्त (Joint) बैंक खाते में ट्रांसफर करती है। हालांकि, इसमें एक महत्वपूर्ण शर्त जोड़ी गई है:
- कुल अनुदान राशि का 50% हिस्सा अगले 5 वर्षों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) यानी मुदत जमा के रूप में बैंक में लॉक रहेगा।
- शेष 50% राशि को नवविवाहित जोड़ा अपनी तुरंत की जरूरतों और संसार की शुरुआत के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
नोट: 50% राशि को 5 साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में रखने के पीछे सरकार का उद्देश्य यह है कि लाभार्थियों को भविष्य के लिए एक दीर्घकालिक (Long-term) आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
3. आवेदन के लिए आवश्यक पात्रता और शर्तें (Eligibility Criteria)
इस सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिए वधू (दुल्हन) और वर (दूल्हा) को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है:
- दिव्यांगता का प्रतिशत: वर या वधू में से जो भी दिव्यांग है, उसकी दिव्यांगता कम से कम 40% या उससे अधिक होनी चाहिए। इसके लिए उनके पास आधार से लिंक डिजिटल UDID कार्ड (वैश्विक दिव्यांगता पहचान पत्र) होना जरूरी है।
- अधिवास (Domicile): दिव्यांग वधू या वर में से कम से कम एक व्यक्ति महाराष्ट्र राज्य का मूल निवासी होना अनिवार्य है।
- पहला विवाह: यह विवाह दोनों (वर और वधू) का प्रथम विवाह होना चाहिए। यदि कोई पार्टनर तलाकशुदा है, तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि उसने पहले कभी इस योजना का लाभ न लिया हो।
- कानूनी विवाह: विवाह पूरी तरह से वैध होना चाहिए और इसका मैरिज रजिस्ट्रेशन (विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र) होना अनिवार्य है।
- आयु सीमा: कानून के अनुसार विवाह के समय लड़के की उम्र 21 वर्ष से अधिक और लड़की की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
- समय सीमा (सबसे महत्वपूर्ण): विवाह संपन्न होने की तारीख से 1 वर्ष (12 महीने) के भीतर इस योजना के लिए आवेदन करना बेहद जरूरी है। 1 वर्ष की अवधि बीत जाने के बाद किए गए आवेदनों को स्वीकार नहीं किया जाता है।
4. आवश्यक कागजात (Important Documents)
आवेदन करते समय आपके पास निम्नलिखित दस्तावेजों की मूल (Original) और सत्यापित प्रतियां होनी चाहिए:
- UDID कार्ड / दिव्यांगता प्रमाणपत्र (आधार से लिंक होना अनिवार्य)
- विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र (Marriage Certificate)
- पति-पत्नी दोनों का आधार कार्ड
- पति-पत्नी का संयुक्त बैंक खाता पासबुक (Joint Bank Account Passbook – जो आधार से लिंक हो)
- महाराष्ट्र राज्य का निवास प्रमाणपत्र (Domicile Certificate)
- आयु का प्रमाण (स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र (LC) या जन्म प्रमाणपत्र)
- पासपोर्ट साइज फोटो
5. आवेदन कहाँ और कैसे करें? (How to Apply)
महाराष्ट्र सरकार ने अब इस पूरी प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और डिजिटल बना दिया है। आप इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन कर सकते हैं।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया (Online Process):
- सबसे पहले महाराष्ट्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल Divyang Sahayak Portal (divyangsahayak.maharashtra.gov.in) पर जाएं।
- यदि आप पहली बार आए हैं, तो New User Registration पर क्लिक करके अपना अकाउंट बनाएं।
- लॉगिन करने के बाद, योजनाओं की सूची में से “दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना” (Disabled Marriage Promotion Scheme) का चयन करें।
- आवेदन फॉर्म में पूछी गई सभी व्यक्तिगत, पारिवारिक और विवाह से जुड़ी जानकारी को ध्यानपूर्वक भरें।
- मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेजों को स्पष्ट रूप से स्कैन करके अपलोड करें।
- फॉर्म को पूरी तरह जांचने के बाद ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।
- भविष्य में स्टेटस ट्रैक करने के लिए Application ID (एप्लिकेशन आईडी) का प्रिंटआउट संभालकर रख लें।
ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया (Offline Process):
यदि आप ऑनलाइन फॉर्म भरने में सहज नहीं हैं, तो आप ऑफलाइन प्रक्रिया का विकल्प चुन सकते हैं:
- अपने जिले के जिल्हा परिषद (Zilla Parishad) कार्यालय में स्थित जिल्हा दिव्यांग सक्षमीकरण अधिकारी (District Disability Empowerment Officer) या समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में जाएं।
- वहां से योजना का आवेदन फॉर्म मुफ्त में प्राप्त करें।
- फॉर्म को पूरी तरह भरकर अपने सभी दस्तावेजों की राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) द्वारा अटेस्टेड (साक्षांकित) की गई फोटोकॉपी साथ में जोड़ें।
- फॉर्म को संबंधित कार्यालय में जमा करें और वहां से आधिकारिक पावती (Receipt) जरूर लें।
6. चयन और पैसा मिलने की प्रक्रिया (Selection Process)
आपके द्वारा आवेदन जमा करने के बाद, संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा आपके कागजातों की बारीकी से जांच (Scrutiny) की जाती है। इसके बाद पात्र आवेदकों की सूची को जिला चयन समिति (District Selection Committee) के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है। इस समिति के अध्यक्ष जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) होते हैं। समिति से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद, अनुदान की राशि सीधे आपके संयुक्त बैंक खाते में DBT के माध्यम से ट्रांसफर कर दी जाती है।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र सरकार की दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना न केवल दिव्यांग जोड़ों को वित्तीय संबल देती है, बल्कि समाज में समानता और सम्मान की भावना को भी मजबूत करती है। ढाई लाख रुपये तक की यह बड़ी मदद किसी भी नए जोड़े को अपने पैरों पर खड़े होने और सम्मानजनक जीवन जीने में बेहद मददगार साबित हो सकती है।
यदि आपके परिवार या परिचित में कोई ऐसा नवविवाहित जोड़ा है जो इन शर्तों को पूरा करता है, तो बिना समय गंवाए (शादी के 1 साल के भीतर) इस योजना के लिए आवेदन जरूर करें।
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