जमीन मोजणी महाराष्ट्र: पारिवारिक बंटवारा अब सिर्फ 200 रुपये में | नए नियम 2026 Land Survey
पारिवारिक विवादों से मिलेगी मुक्ति: सरकारी भू-मापन नियमों में हुए बड़े बदलाव और नई समय-सीमा की पूरी जानकारी।
महाराष्ट्र में जमीन मापना हुआ आसान: पारिवारिक बंटवारे की मोजणी अब सिर्फ 200 रुपये में! Land Survey
महाराष्ट्र के लाखों किसान और जमीन मालिकों के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और अत्यंत राहत भरा फैसला लिया है। अक्सर देखा जाता था कि जमीन की मोजणी (सर्वेक्षण) के लिए लोगों को महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे और कई बार लंबी प्रक्रियाओं के कारण काम अधर में लटक जाता था। अब, राजस्व विभाग द्वारा जारी किए गए नए नियमों के साथ, इस प्रक्रिया को न केवल सस्ता बल्कि समयबद्ध भी बना दिया गया है।
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महाराष्ट्र सरकार ने जमीन मोजणी के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब पारिवारिक बंटवारे की मोजणी मात्र 200 रुपये में होगी और पूरी प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से पूरी की जाएगी। जानें नए शुल्क और नियम।
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क्या है सरकार का नया फैसला?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने जमीन मोजणी की शुल्क संरचना और प्रक्रिया में व्यापक सुधारों की घोषणा की है। इस नए बदलाव का मुख्य उद्देश्य पारदर्शी और तेज सेवा सुनिश्चित करना है।
सबसे महत्वपूर्ण घोषणा ‘पारिवारिक बंटवारे’ (Family Partition) को लेकर है। अब परिवार के भीतर आपसी सहमति से या अदालत के आदेशानुसार होने वाली जमीन की मोजणी के लिए प्रति ‘पोटहिस्सा’ (सब-डिवीजन) मात्र 200 रुपये का शुल्क तय किया गया है।
समयबद्ध प्रक्रिया: अब 90 और 30 दिनों का ‘डेडलाइन फॉर्मूला’
सरकार ने मोजणी प्रक्रिया में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए ‘डेडलाइन’ का नियम लागू किया है। अब अधिकारियों के लिए समय सीमा के भीतर काम पूरा करना अनिवार्य होगा:
- नियमित मोजणी (Regular Survey): इसके लिए 90 दिनों की समय सीमा तय की गई है।
- द्रुतगती मोजणी (Fast-track Survey): इस प्रक्रिया के तहत आवेदन के 30 दिनों के भीतर मोजणी पूरी करनी होगी।
यह नियम उन लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है जो लंबे समय से अपनी जमीन के आधिकारिक सीमांकन का इंतज़ार कर रहे थे।
जमीन मोजणी की नई शुल्क संरचना (शुल्क विवरण)
नए नियमों के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों और श्रेणियों के लिए शुल्क नीचे दिए गए हैं:
1. पारिवारिक बंटवारा (Family Partition)
- शुल्क: मात्र 200 रुपये प्रति पोटहिस्सा।
- शर्त: इसके लिए आवेदन के साथ परिवार के सभी सदस्यों की सहमति पत्र और पारिवारिक होने का प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।
2. ग्रामीण क्षेत्र (Rural Areas)
- 2 हेक्टर तक की जमीन के लिए नियमित मोजणी: 2,000 रुपये।
- 2 हेक्टर तक की जमीन के लिए द्रुतगती मोजणी: 8,000 रुपये।
3. शहरी क्षेत्र (Urban Areas)
- 1 हेक्टर तक की जमीन के लिए नियमित मोजणी: 3,000 रुपये।
- 1 हेक्टर तक की जमीन के लिए द्रुतगती मोजणी: 12,000 रुपये।
मोजणी के दौरान नियम और दंड (Penalty Provisions)
प्रक्रिया को अनुशासित बनाने के लिए सरकार ने कुछ कड़े नियम भी बनाए हैं:
- अनुपस्थिति का दंड: यदि मोजणी के लिए तय की गई तारीख पर आवेदक (जमीन मालिक) उपस्थित नहीं रहता है, तो उसे ‘पुनर्भेट शुल्क’ के रूप में मूल शुल्क का 50% या अधिकतम 10,000 रुपये तक का दंड देना पड़ सकता है।
- अधिकारी की अनुपस्थिति: दूसरी ओर, यदि किसी कारण से सरकारी भूमापक (Surveyor) मोजणी के दिन उपस्थित नहीं होता है, तो आवेदक पर कोई पुनर्भेट शुल्क लागू नहीं होगा। यह एक बहुत ही सकारात्मक और निष्पक्ष कदम है।
अन्य विशेष प्रावधान
- सरकारी संस्थाएं: अर्ध-सरकारी संस्थाओं के लिए मोजणी शुल्क में 50% और पूर्णतः सरकारी जमीनों के लिए 75% की विशेष छूट दी गई है।
- उच्च-तपासणी (Re-verification): यदि कोई आवेदक कनिष्ठ भूमापक की मोजणी से संतुष्ट नहीं है और उसे आक्षेप है, तो वह उच्च-तपासणी के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में उसे मूल शुल्क का 3 से 5 गुना तक शुल्क देना पड़ सकता है।
- गुंठेवारी मोजणी: महाराष्ट्र गुंठेवारी विकास अधिनियम के तहत आने वाले भूखंडों की मोजणी के लिए नियमित दर से 1.5 गुना अधिक शुल्क लिया जाएगा।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र सरकार का यह निर्णय पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम है। दशकों से चली आ रही मोजणी की जटिल और महंगी प्रक्रिया को अब आम आदमी के अनुकूल बना दिया गया है। इससे भ्रष्टाचार में कमी आएगी और किसानों को अपनी पुश्तैनी जमीन के कागजात दुरुस्त करने में मदद मिलेगी।
यदि आप अपनी जमीन की मोजणी कराने की योजना बना रहे हैं, तो अपने नजदीकी भूमि अभिलेख कार्यालय (Land Records Office) में जाकर इन नए नियमों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें और प्रक्रिया का लाभ उठाएं।
नोट: यह जानकारी जून 2026 में जारी सरकारी निर्देशों पर आधारित है। किसी भी कानूनी कार्यवाही के लिए अपने स्थानीय राजस्व कार्यालय से नवीनतम सरकारी अधिसूचना की पुष्टि अवश्य करें।
क्या आपको लगता है कि 90 दिनों की यह नई समय सीमा जमीन संबंधी विवादों को सुलझाने में प्रभावी साबित होगी? अपने विचार कमेंट्स में साझा करें।




